यह गीत उन अनकहे ज़ख्मों को सुरों में पिरोकर मरहम लगाने की बात करता है, जब आँसू सूख जाते हैं और केवल गीत ही दिल का बोझ हल्का कर सकते हैं। यह एक सशक्त और भावुक रचना है।
[मुखड़ा 1]
एक बोझ सा है, जो कंधों पे ठहरा
कभी आँखों से छलका, कभी बन के बहरा
हज़ार कोशिश की, कि छुपा लूँ इसे
मगर ये आग सी, जलती रही दिल में
[पूर्व-कोरस]
आँसू भी सूखे, अब आवाज़ है ये
जुबाँ पे आके ठहरी, एक साज़ है ये
[कोरस]
दर्द जब हद से गुज़रता है, तो गा लेते हैं
ये अनकहे किस्से, सुरों से सुना लेते हैं
दिल की तन्हाई को, आवाज़ बना लेते हैं
हर ज़ख्म को अपने, मरहम लगा लेते हैं
[मुखड़ा 2]
ख़ामोश रातों में, एक टीस उठती है
जब यादों की परछाई, साथ चलती है
दुनिया से कब तक, ये राज़ छुपाना
हर टूटी धड़कन को, अब गीत बनाना
[पूर्व-कोरस]
आँसू भी सूखे, अब आवाज़ है ये
जुबाँ पे आके ठहरी, एक साज़ है ये
[कोरस]
दर्द जब हद से गुज़रता है, तो गा लेते हैं
ये अनकहे किस्से, सुरों से सुना लेते हैं
दिल की तन्हाई को, आवाज़ बना लेते हैं
हर ज़ख्म को अपने, मरहम लगा लेते हैं
[पुल]
ये गीत ही तो हैं, मेरे हमराज़ प्यारे
इनमें ही मिलते हैं, मेरे टूटे सहारे
हर पल का दर्द, अब मेरा साथी है
सुरों की दुनिया में, यही तो शांति है
[कोरस]
दर्द जब हद से गुज़रता है, तो गा लेते हैं
ये अनकहे किस्से, सुरों से सुना लेते हैं
दिल की तन्हाई को, आवाज़ बना लेते हैं
हर ज़ख्म को अपने, मरहम लगा लेते हैं
[अंतिम पद]
मरहम लगा लेते हैं, मरहम लगा लेते हैं
गीतों में ही अब, ज़िंदगी सजा लेते हैं।
Invite : Dil ki tanhai ko aawaz banaa lete hainDard jab hadd se guzarta hai to gaa late hainDard jab hadd se guzarta hai to gaa lete hainRead more:
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