Paroles #5517
खामोशी का सुर
यह गीत उस आंतरिक शक्ति को दर्शाता है जो दिल के अकेलेपन और दर्द को आवाज़ देती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे मौन पीड़ा को गाकर मुक्ति मिलती है।
[Verse 1]
अंधेरे कोने में, जब बैठ जाए दिल
कोई न पूछे, कैसा है ये मुश्किल
लफ़्ज़ों में उलझी, हर बात रह जाए
सीने में गहरी, एक आग जल जाए
[Chorus]
खामोशी को तोड़कर, जब सुर उठते हैं
दर्द की ज़ंजीरों से, दिल छूटते हैं
ये आवाज़ ही तो है, मेरी पहचान
जब हद से बढ़े ग़म, तब गाए ये जान
[Verse 2]
लोगों की भीड़ में भी, मैं अकेली खड़ी
कहने को बातें, पर लगती हैं बड़ी
कोई कहाँ जाने, दिल का ये हाल
हर साँस में सिमटा, बीता हर साल
[Chorus]
खामोशी को तोड़कर, जब सुर उठते हैं
दर्द की ज़ंजीरों से, दिल छूटते हैं
ये आवाज़ ही तो है, मेरी पहचान
जब हद से बढ़े ग़म, तब गाए ये जान
[Bridge]
नहीं चाहिए कोई हमदर्द, नहीं कोई सहारा
बस यही एक नगमा, मेरा है किनारा
बहते हैं आँसू, पर होंठों पे गीत है
ज़िन्दगी से मिली ये, अनमोल सी जीत है
[Chorus]
खामोशी को तोड़कर, जब सुर उठते हैं
दर्द की ज़ंजीरों से, दिल छूटते हैं
ये आवाज़ ही तो है, मेरी पहचान
जब हद से बढ़े ग़म, तब गाए ये जान
[Outro]
हाँ, गाए ये जान...
हर दर्द को सुर बनाकर,
हम गाए ये जान...
Invite : Dil ki tanhai ko aawaz banaa lete hainDard jab hadd se guzarta hai to gaa late hainDard jab hadd se guzarta hai to gaa lete hai
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