यह गीत समय के बदलते मौसमों और गुज़रे पलों की अमिट छाप को दर्शाता है जो हमें कभी हँसाते हैं और कभी रुलाते हैं। यह एक मधुर और चिंतनशील रचना है।
[Verse 1]
एक पल में खिलती है हँसी
दूजे पल में आँखें हैं नमी
क्या लिखें, क्या मिटाएँ हम
ये सिलसिला चलता ही रहे हर दम
[Chorus]
लम्हों का साया है, ये जीवन का हर रंग
कभी खुशियों की धुन है, कभी यादों का संग
कभी सावन की बूँदें, कभी पतझड़ की रेत
ये गुज़रते हुए पल, देते हर नया भेस
[Verse 2]
जो बीता कल वो लौट कर न आए
बस उसकी यादें दिल में समाए
एक मीठा दर्द दे जाती हैं
हमें पल-पल तड़पाती हैं
[Chorus]
लम्हों का साया है, ये जीवन का हर रंग
कभी खुशियों की धुन है, कभी यादों का संग
कभी सावन की बूँदें, कभी पतझड़ की रेत
ये गुज़रते हुए पल, देते हर नया भेस
[Bridge]
वक़्त की डोर पे हम बंधे हुए
कभी उड़ते, कभी गिरते हुए
मंज़िल का पता नहीं, राहें कहाँ ले जाएँ
ये खेल है जीवन का, कभी रुलाए, कभी हँसाए
[Chorus]
लम्हों का साया है, ये जीवन का हर रंग
कभी खुशियों की धुन है, कभी यादों का संग
कभी सावन की बूँदें, कभी पतझड़ की रेत
ये गुज़रते हुए पल, देते हर नया भेस
[Outro]
हाँ, ये लम्हों का साया है...
कभी खुशियाँ, कभी ग़म है...
Ledetekst: कभी हँसना है, कभी रोना हैजीवन सुख-दुख का संगम हैकभी पतझड़ है, कभी सावन हैये आता-जाता मौसम हैगुज़रे हुए लम्हों की यादेंहर वक़्त हमें तड़पाती हैंएक साया बनके आती हैंएक साया बनके जाती हैं
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